‘बस का सफ़र ‘

मेरा बहुत दिनों के बाद,

 बस से सफ़र करना ।

खिड़कियों का खुलना ,

ठंडी ठंडी हवाओं का लगना ,

बच्चो का खिड़कियों से बाहर देखना।

यात्रियों का आना जाना,

और अपनी अपनी मंजिलो में पहुचना।

ड्राइवर अंकल का टूटा हुआ दिल,

फिर उनका गाना बजाना।

कंडक्टर भैया का ,

टिकट-टिकट और पैसे को गिनना।

कंडक्टर भैया का कहना –

की यात्री अपने सामान की रक्षा स्वयं करे।

माता पिता को ,

अपने बच्चों का ध्यान रखना।

बूढ़े दादा – दादियों का ,

जिंदगी के बारे में बात करना ।

मेरा बस से उतर कर, 

अपने गाँव वाले घर में पहुँचने ।

मेरा बहुत दिनों के बाद,

बस से सफर करना।

~क्रतिज भार्गव पंद्रे

By Kratiz

A middle class , 25 yrs old me residing in nainpur, mandla, m.p., india , pursuing masters of surgery in general surgery in IGGMC , nagpur from feb 2025. I love to write , play sports , listen music , and dance randomly.

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