
‘बस का सफ़र ‘
मेरा बहुत दिनों के बाद,
बस से सफ़र करना ।
खिड़कियों का खुलना ,
ठंडी ठंडी हवाओं का लगना ,
बच्चो का खिड़कियों से बाहर देखना।
यात्रियों का आना जाना,
और अपनी अपनी मंजिलो में पहुचना।
ड्राइवर अंकल का टूटा हुआ दिल,
फिर उनका गाना बजाना।
कंडक्टर भैया का ,
टिकट-टिकट और पैसे को गिनना।
कंडक्टर भैया का कहना –
की यात्री अपने सामान की रक्षा स्वयं करे।
माता पिता को ,
अपने बच्चों का ध्यान रखना।
बूढ़े दादा – दादियों का ,
जिंदगी के बारे में बात करना ।
मेरा बस से उतर कर,
अपने गाँव वाले घर में पहुँचने ।
मेरा बहुत दिनों के बाद,
बस से सफर करना।
~क्रतिज भार्गव पंद्रे
